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France Curfew:-फ्रांस में हिंसा से हड़कंप! 60 हजार सुरक्षाकर्मी भी पड़े कम, मैक्रों ने गृह मंत्री का इस्तीफा ठुकराया

France Curfew:-फ्रांस में महंगाई, बढ़ती जीवन-यापन लागत और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन हिंसक घटनाओं में बदल गया है। पेरिस समेत कई बड़े शहरों में दुकानों में लूटपाट, सार्वजनिक संपत्तियों में तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाओं ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। हालात को लेकर राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने हिंसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है और सुरक्षा व्यवस्था में चूक की समीक्षा के निर्देश दिए हैं। इस बीच गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज के इस्तीफे की पेशकश को भी राष्ट्रपति ने ठुकरा दिया है।

France Curfew:-पूरे फ्रांस में कर्फ्यू नहीं, प्रभावित इलाकों पर फोकस

हिंसा के बाद फ्रांस में कर्फ्यू को लेकर चर्चाएं तेज हैं। हालांकि, 19 अक्टूबर की उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने देशभर में एकसाथ कर्फ्यू लगाने के बजाय हिंसा प्रभावित इलाकों में सीमित और स्थानीय कर्फ्यू लगाने की अपील की है। सरकार का जोर संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ाने और हिंसक घटनाओं पर नियंत्रण पाने पर है। इसलिए फिलहाल पूरे फ्रांस में कर्फ्यू लागू होने का दावा करना सही नहीं होगा।

17 अक्टूबर को सड़कों पर उतरे हजारों प्रदर्शनकारी

फ्रांस में 17 अक्टूबर को बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। इन प्रदर्शनों के पीछे महंगाई, जीवन-यापन की बढ़ती लागत, शिक्षा व्यवस्था में समस्याएं और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर नाराजगी प्रमुख वजहें बताई गई हैं। शुरुआती प्रदर्शन कई जगह शांतिपूर्ण थे, लेकिन बाद में कुछ समूहों की ओर से हिंसा, आगजनी और लूटपाट की घटनाएं सामने आईं।

प्रदर्शनकारियों की संख्या को लेकर भी अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। सरकारी अनुमान के मुताबिक, देशभर में करीब 5.5 लाख लोग प्रदर्शनों में शामिल हुए, जबकि आयोजकों ने यह संख्या 8 लाख से अधिक बताई।

पेरिस से मार्सेई तक तोड़फोड़, हजारों लोग हिरासत में

हिंसा का असर राजधानी पेरिस के अलावा मार्सेई, लियोन और लिमोज जैसे शहरों में भी देखने को मिला। कई दुकानों और कारोबारों को निशाना बनाया गया। कुछ स्थानों पर सार्वजनिक इमारतों में तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं हुईं। लिमोज में ऐतिहासिक टाउन हॉल में आग लगने की घटना भी सामने आई।

अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक, सप्ताहांत में देशभर में करीब 2,400 लोगों को गिरफ्तार या हिरासत में लिया गया। कारोबारों को हुए नुकसान के आंकड़े अलग-अलग हैं। कुछ रिपोर्टों में लगभग 1,500 दुकानों को नुकसान पहुंचने, जबकि अन्य रिपोर्टों में करीब 3,000 कारोबारों के प्रभावित होने का उल्लेख है।

60 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के बावजूद बिगड़े हालात

फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज के मुताबिक, 17 अक्टूबर को देशभर में पुलिस, जेंडरमेरी और अन्य सुरक्षा बलों के लगभग 60 हजार कर्मियों को तैनात किया गया था। इसके बावजूद कुछ बड़े शहरों में हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने में मुश्किलें आईं।

नुनेज ने माना कि प्रदर्शनकारियों की संख्या और हिंसा में शामिल लोगों की मौजूदगी का अनुमान कम लगाया गया था। उनके अनुसार, सुरक्षा बलों की तैनाती की योजना वास्तविक हालात के अनुरूप नहीं थी। हिंसा के दौरान बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों और जेंडरमेरी कर्मियों के घायल होने की भी खबर है। विभिन्न रिपोर्टों में घायलों की संख्या करीब एक हजार बताई गई है।

मैक्रों ने क्यों ठुकराया गृह मंत्री का इस्तीफा?

हिंसा पर काबू पाने में नाकामी और सुरक्षा व्यवस्था की तैयारियों पर सवाल उठने के बाद गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंपा। हालांकि, मैक्रों ने इसे स्वीकार नहीं किया। फ्रांसीसी राष्ट्रपति कार्यालय के मुताबिक, मौजूदा हालात में सुरक्षा बलों की कमान में निरंतरता बनाए रखना जरूरी है।

मैक्रों ने सुरक्षा व्यवस्था की तैयारियों और खुफिया सूचनाओं के आकलन में हुई चूक पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने गृह मंत्री को हिंसक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने और जमीन पर सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए हैं।

सामाजिक नाराजगी के बीच सरकार पर बढ़ा दबाव

फ्रांस में मौजूदा संकट केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है। महंगाई, शिक्षा व्यवस्था, सार्वजनिक सेवाओं और आर्थिक दबाव को लेकर लोगों में असंतोष लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। हालिया प्रदर्शनों ने सरकार के सामने दोहरी चुनौती खड़ी कर दी है—एक तरफ शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की शिकायतों पर ध्यान देना और दूसरी तरफ हिंसा तथा लूटपाट पर सख्ती से रोक लगाना।

राष्ट्रपति मैक्रों ने शांतिपूर्ण विरोध और हिंसक गतिविधियों के बीच अंतर करने पर जोर दिया है। सरकार के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती सार्वजनिक व्यवस्था बहाल करने के साथ-साथ लोगों का भरोसा कायम करना है। आने वाले दिनों में सुरक्षा उपायों और सरकार की प्रतिक्रिया पर फ्रांस की राजनीति में बहस और तेज हो सकती है।

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