छत्तीसगढ़

Chhattisgarh Mahtari:-‘छत्तीसगढ़ महतारी’ की तस्वीर पर कलाकार का हक, अब इस्तेमाल से पहले लेनी होगी अनुमति; 3 साल बाद मिली कॉपीराइट मान्यता

Chhattisgarh Mahtari:-रायपुर। छत्तीसगढ़ की पहचान और अस्मिता से जुड़ी ‘छत्तीसगढ़ महतारी’ की वह तस्वीर, जो आज सरकारी कार्यक्रमों से लेकर सार्वजनिक आयोजनों तक नजर आती है, अब अपने कलाकार के कॉपीराइट अधिकार को लेकर चर्चा में है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक इस चर्चित चित्र के कलाकार ईश्वर साहू ‘बंधी’ ने इसकी कॉपीराइट मान्यता हासिल की है। उन्होंने फरवरी 2023 में इसके लिए आवेदन किया था और सुनवाई की प्रक्रिया के बाद अब उन्हें इस कृति पर कॉपीराइट अधिकार मिला है।

Chhattisgarh Mahtari:-2022 में सरकारी कार्यक्रमों का हिस्सा बनी थी तस्वीर

18 जून 2022 को तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया के जरिए छत्तीसगढ़ महतारी की इस तस्वीर को साझा किया था। उस समय सरकार ने इसे शासकीय कार्यक्रमों में प्रमुखता से स्थान देने का निर्णय बताया था, ताकि प्रदेश के इतिहास, संस्कृति और मिट्टी के गौरव को याद किया जा सके।

इस चित्र में छत्तीसगढ़ महतारी को हरे रंग की साड़ी, पारंपरिक आभूषण और परिधान में दिखाया गया है। एक हाथ में धान की बाली और हंसिया है, जबकि दूसरा हाथ आशीर्वाद की मुद्रा में है। यही तस्वीर धीरे-धीरे प्रदेश के सरकारी आयोजनों और सार्वजनिक स्थानों पर पहचान का हिस्सा बन गई।

Chhattisgarh Mahtari:-कलाकार का आरोप- इस्तेमाल हुआ, लेकिन श्रेय नहीं मिला

ईश्वर साहू ‘बंधी’ के मुताबिक उनकी बनाई तस्वीर को सरकारी कार्यक्रमों में इस्तेमाल किए जाने और इसके आधार पर प्रतिमाएं लगाए जाने से उन्हें खुशी हुई, लेकिन उनका कहना है कि तस्वीर के इस्तेमाल से पहले उनसे अनुमति नहीं ली गई और न ही उन्हें इसके निर्माता के तौर पर अपेक्षित श्रेय मिला। उपलब्ध रिपोर्ट में उनके इसी दावे का उल्लेख है।

दरअसल, इस तस्वीर के आधार पर छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमाएं भी स्थापित की गई हैं। वर्ष 2023 में जगदलपुर कलेक्टर कार्यालय परिसर में भी छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा का अनावरण किया गया था।

Chhattisgarh Mahtari:-तीन साल चली प्रक्रिया, अब मिला कॉपीराइट

ईश्वर साहू ने फरवरी 2023 में अपनी कृति के कॉपीराइट के लिए आवेदन किया था। उनके मुताबिक लगातार इस्तेमाल को देखते हुए उन्होंने यह कदम इसलिए उठाया, ताकि उनकी कलाकृति का अनधिकृत इस्तेमाल रोका जा सके और कलाकार के तौर पर उन्हें पहचान मिल सके। अब सुनवाई की प्रक्रिया के बाद उन्हें इस कृति पर कॉपीराइट मिलने की जानकारी सामने आई है।

भारत के Copyright Act के तहत पेंटिंग, ड्राइंग, फोटोग्राफ और दूसरी मूल कलात्मक कृतियां ‘artistic work’ के दायरे में आती हैं। कानून के मुताबिक किसी कृति का लेखक सामान्य परिस्थितियों में उसका पहला कॉपीराइट मालिक होता है।

Chhattisgarh Mahtari:-क्या अब तस्वीर इस्तेमाल करने के लिए पैसे देने होंगे?

यह सवाल भी सामने आया है कि कॉपीराइट मिलने के बाद क्या तस्वीर के इस्तेमाल के लिए शुल्क देना होगा?

उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक ईश्वर साहू का कहना है कि पैसा उनकी प्राथमिकता नहीं है। उनका जोर इस बात पर है कि उनकी कृति का इस्तेमाल करने से पहले आवश्यक अनुमति ली जाए और कलाकार के तौर पर उन्हें उचित श्रेय दिया जाए। हालांकि, कॉपीराइट कानून के तहत अधिकारों के इस्तेमाल के लिए लाइसेंस की व्यवस्था भी मौजूद है और अधिकार का उल्लंघन होने पर कानूनी उपाय उपलब्ध हैं।

Chhattisgarh Mahtari:-क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

यह मामला सिर्फ एक तस्वीर के इस्तेमाल तक सीमित नहीं है। यह इस सवाल को भी सामने लाता है कि सार्वजनिक महत्व की किसी कलाकृति का इस्तेमाल करते समय उसके रचनाकार के अधिकार और पहचान का कितना ध्यान रखा जाता है।

वहीं एक जरूरी कानूनी तथ्य यह भी है कि कॉपीराइट किसी नाम या विचार पर सामान्य तौर पर लागू नहीं होता, बल्कि मूल अभिव्यक्ति या कलात्मक कृति पर लागू होता है। इसलिए यहां चर्चा संबंधित ‘छत्तीसगढ़ महतारी’ चित्र की है, न कि ‘छत्तीसगढ़ महतारी’ नाम पर किसी सामान्य स्वामित्व की।

ईश्वर साहू की यह पहल अब कलाकारों के अधिकार, उनकी कृतियों के इस्तेमाल और उन्हें मिलने वाले श्रेय को लेकर एक महत्वपूर्ण चर्चा को जन्म देती है।

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