CG Health Department:-छत्तीसगढ़ में डॉक्टरों की मांगों पर एक्शन के संकेत! हाईकोर्ट की सुनवाई से पहले आदेश जारी करने की बात

CG Health Department:-रायपुर। छत्तीसगढ़ में चिकित्सकों की लंबित मांगों और स्वास्थ्य विभाग में प्रशासनिक पदस्थापनाओं को लेकर हलचल तेज हो गई है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के साथ चिकित्सकीय संगठनों की बैठक में बॉन्ड डॉक्टरों की वेतनवृद्धि, प्री-पीजी परीक्षा के लिए मॉर्गेज की शर्त हटाने, गैर-चिकित्सकीय अधिकारियों की पदस्थापना और डॉ. धर्मेन्द्र कुमार गहवई के निलंबन सहित कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। संगठनों के मुताबिक, स्वास्थ्य मंत्री ने इन मामलों में सकारात्मक पहल का भरोसा दिलाया है।
बैठक में जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA), छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन (CGDF) और छत्तीसगढ़ इन-सर्विस डॉक्टर्स एसोसिएशन (CIDA) के प्रदेश अध्यक्षों के साथ स्वास्थ्य सेवाएं संचालनालय (DHS) के वरिष्ठ उप संचालक भी शामिल हुए।

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CG Health Department:-बॉन्ड डॉक्टरों की सैलरी बढ़ाने और मॉर्गेज हटाने की मांग
बैठक में JDA के अध्यक्ष डॉ. पीयूष श्रीवास्तव और CGDF के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. हीरा सिंह लोधी ने UG और PG बॉन्ड चिकित्सकों की वेतनवृद्धि का मुद्दा उठाया। इसके साथ ही प्री-पीजी परीक्षा और उच्च शिक्षा से संबंधित प्रक्रिया में मॉर्गेज की शर्त हटाने की मांग भी रखी गई।
चिकित्सकीय संगठनों के अनुसार, स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि इन मांगों पर विभागीय प्रक्रिया जारी है। उन्होंने प्रतिनिधियों को वित्त विभाग और विधि विभाग के समक्ष अपना पक्ष रखने तथा संबंधित फाइलों पर नियमित फॉलोअप करने की सलाह दी। हालांकि, बैठक में इन मांगों पर अंतिम स्वीकृति मिलने की पुष्टि नहीं हुई है।
CG Health Department:-स्वास्थ्य विभाग में गैर-चिकित्सकीय अधिकारियों की पदस्थापना पर विवाद
बैठक का एक प्रमुख मुद्दा स्वास्थ्य सेवाएं संचालनालय (DHS) और चिकित्सा शिक्षा संचालनालय (DME) में चिकित्सकीय संवर्ग के लिए निर्धारित प्रशासनिक पदों पर गैर-चिकित्सकीय अधिकारियों की नियुक्ति रहा।
चिकित्सकीय संगठनों ने ऐसी पदस्थापनाओं को निरस्त करने की मांग करते हुए कहा कि संबंधित पदों पर भर्ती नियमों, पात्रता और वरिष्ठता के आधार पर योग्य चिकित्सकीय अधिकारियों को जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। संगठनों का तर्क है कि इससे चिकित्सकों के संवर्गीय अधिकारों, पदोन्नति और प्रशासनिक हितों की रक्षा हो सकेगी।
CG Health Department:-28 अक्टूबर को हाईकोर्ट में सुनवाई, उससे पहले फैसले की उम्मीद
DHS और DME में अपर संचालक, संयुक्त संचालक, संचालक तथा RMA से जुड़े पदों पर नियुक्तियों और पदस्थापनाओं का मामला न्यायालय में विचाराधीन होने की बात भी बैठक में रखी गई। संगठनों के अनुसार, संबंधित प्रकरणों में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में 28 अक्टूबर 2026 को अंतिम सुनवाई निर्धारित है।
इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने कथित तौर पर कहा कि यदि हाईकोर्ट में अंतिम सुनवाई से पहले ही सरकार डॉक्टरों के पक्ष में आदेश जारी कर दे, तो कैसा रहेगा? मंत्री की इस टिप्पणी को चिकित्सकीय संगठनों ने सकारात्मक संकेत के रूप में देखा।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि बैठक में व्यक्त की गई मंशा को अंतिम सरकारी आदेश नहीं माना जा सकता। पदस्थापनाओं को लेकर वास्तविक स्थिति संबंधित सरकारी आदेश और न्यायालय की कार्यवाही से ही स्पष्ट होगी।
CG Health Department:-डॉ. धर्मेन्द्र गहवई के निलंबन की फाइल खुद देखेंगे मंत्री
बैठक में डॉ. धर्मेन्द्र कुमार गहवई के निलंबन का मामला भी प्रमुखता से उठा। चिकित्सकीय संगठनों ने बताया कि डॉ. गहवई ने चिकित्सकीय संवर्ग के प्रशासनिक पदों पर गैर-चिकित्सकीय अधिकारियों की पदस्थापना को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया है।
संगठनों ने इस बात पर चिंता जताई कि न्यायालय में अपने संवर्गीय अधिकारों के संरक्षण के लिए याचिका दायर करने वाले चिकित्सकों के खिलाफ किसी भी प्रतिकूल कार्रवाई को लेकर सवाल उठ सकते हैं। उन्होंने संबंधित मामले की निष्पक्ष समीक्षा की जरूरत बताई।
बैठक में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि वह डॉ. धर्मेन्द्र गहवई के निलंबन की फाइल व्यक्तिगत रूप से मंगवाकर देखेंगे। संगठनों के अनुसार, मंत्री ने याचिकाकर्ता चिकित्सकों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं होने का आश्वासन भी दिया।
CG Health Department:-डॉक्टरों को लंबित मांगों पर फैसले का इंतजार
बैठक के बाद JDA, CGDF और CIDA ने चिकित्सकों के वेतन, वरिष्ठता, पदोन्नति, बॉन्ड संबंधी समस्याओं और सेवा अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर संयुक्त रूप से प्रयास जारी रखने की बात कही।
अब चिकित्सकीय संगठनों की नजर लंबित मांगों पर शासन के अगले कदम और 28 अक्टूबर को प्रस्तावित हाईकोर्ट सुनवाई पर है। फिलहाल बैठक से जुड़े आश्वासनों के बाद डॉक्टरों को उम्मीद है कि लंबे समय से लंबित मुद्दों पर जल्द निर्णय लिया जाएगा।
