EXCLUSIVE:-‘मैं भारतीय नहीं, वानुआतु का नागरिक हूं!’ महादेव सट्टा ऐप के सौरभ चंद्राकर का बड़ा दावा, ओमान की अदालत में खुली नागरिकता की नई कहानी

EXCLUSIVE:- महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप मामले के मुख्य आरोपियों में शामिल सौरभ चंद्राकर की भारत वापसी के बाद अब उसकी नागरिकता को लेकर नया विवाद सामने आया है। ओमान में प्रत्यर्पण की सुनवाई के दौरान चंद्राकर ने दावा किया था कि वह वर्ष 2020 में भारतीय नागरिकता छोड़ चुका है और अब प्रशांत महासागर के द्वीपीय देश वानुआतु का नागरिक है। हालांकि, भारतीय दूतावास से मिली जानकारी के आधार पर ओमान की अदालत ने उसे भारतीय नागरिक माना और भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध को मंजूरी दी।

EXCLUSIVE:-वानुआतु की नागरिकता का दावा, लेकिन भारतीय दूतावास की रिपोर्ट ने बदला मामला
सौरभ चंद्राकर ने ओमान में चल रही कानूनी प्रक्रिया के दौरान खुद को वानुआतु का नागरिक बताया था। उसका दावा था कि वह वर्ष 2020 में ही भारतीय नागरिकता छोड़ चुका है और इसके लिए आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर चुका है।
हालांकि, 30 अगस्त 2026 को मस्कट स्थित भारतीय दूतावास से मिले पत्र में चंद्राकर के भारतीय नागरिक होने और भारतीय पासपोर्ट रखने की पुष्टि की गई थी। ओमान की अदालत ने इस जानकारी को महत्वपूर्ण माना।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि चंद्राकर के पास वानुआतु की नागरिकता हो, तब भी यह अपने आप में भारत प्रत्यर्पण रोकने का आधार नहीं बनता। दूसरी ओर, प्रवर्तन निदेशालय (ED) उसके वानुआतु पासपोर्ट को रद्द कराने की दिशा में भी कार्रवाई कर रहा है।
EXCLUSIVE:-भारत और UAE दोनों ने मांगा था प्रत्यर्पण
सौरभ चंद्राकर को अपने देश लाने के लिए भारत के साथ संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भी ओमान के समक्ष प्रत्यर्पण अनुरोध प्रस्तुत किया था।
8 अक्टूबर 2026 को मस्कट की अपीलीय अदालत ने भारत के पक्ष में फैसला सुनाया। अदालत ने पाया कि भारत का अनुरोध संबंधित कानूनी आवश्यकताओं और द्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधि के अनुरूप था।
वहीं UAE का अनुरोध आवश्यक कानूनी आश्वासनों की कमी के कारण स्वीकार नहीं किया गया। ओमान में कथित फर्जी यात्रा दस्तावेजों से जुड़े मामले की वजह से चंद्राकर की भारत वापसी तत्काल नहीं हो सकी थी।
EXCLUSIVE:-दिल्ली की अदालत में गिरफ्तारी पर सवाल, CBI की कार्रवाई को बताया अवैध
1 नवंबर को भारत लाए जाने के बाद सौरभ चंद्राकर को 2 नवंबर 2026 को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश निखिल चोपड़ा की अदालत में CBI ने दो दिन की ट्रांजिट रिमांड मांगी, ताकि आरोपी को रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया जा सके।
चंद्राकर के वकील तुषार गिरी ने गिरफ्तारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि ओमान से प्रत्यर्पण ED के मनी लॉन्ड्रिंग मामले के लिए हुआ था, जबकि CBI ने अलग मामले में उसे गिरफ्तार किया है।
बचाव पक्ष ने प्रत्यर्पण अधिनियम की धारा 21 और डॉक्ट्रिन ऑफ स्पेशियलिटी का हवाला दिया। इस सिद्धांत के तहत प्रत्यर्पित व्यक्ति पर अन्य पुराने अपराधों में मुकदमा चलाने को लेकर कानूनी प्रतिबंध और अपवाद लागू हो सकते हैं।

EXCLUSIVE:-CBI ने कहा—दोनों मामलों के बीच सीधा संबंध
CBI ने बचाव पक्ष की दलीलों का विरोध किया। एजेंसी ने अदालत को बताया कि सौरभ चंद्राकर के खिलाफ रायपुर की विशेष अदालत से गैर-जमानती वारंट जारी है और उसके विरुद्ध आरोपपत्र भी दाखिल किया जा चुका है।
CBI के मुताबिक, ED का मनी लॉन्ड्रिंग मामला उसी मूल अपराध से जुड़ा है जिसकी जांच CBI कर रही है।
एजेंसी ने यह भी कहा कि बचाव पक्ष द्वारा प्रस्तुत ओमान की अदालत के आदेश की प्रति प्रमाणित नहीं थी। ऐसे में केवल उस दस्तावेज के आधार पर गिरफ्तारी को अवैध नहीं माना जा सकता।
EXCLUSIVE:-4 नवंबर तक रायपुर कोर्ट में पेश करने का आदेश
दोनों पक्षों को सुनने के बाद दिल्ली की अदालत ने CBI को सौरभ चंद्राकर की दो दिन की ट्रांजिट रिमांड दे दी।
अदालत ने निर्देश दिया कि आरोपी को 4 नवंबर 2026 तक रायपुर की विशेष CBI अदालत में पेश किया जाए।
हालांकि, अदालत ने यह अंतिम फैसला नहीं दिया कि प्रत्यर्पण की शर्तों के तहत CBI के मामले में चंद्राकर पर मुकदमा चलाया जा सकता है या नहीं। इस कानूनी विवाद पर रायपुर की संबंधित विशेष अदालत निर्णय करेगी।
EXCLUSIVE:-क्या है महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामला?
छत्तीसगढ़ के भिलाई निवासी सौरभ चंद्राकर और उसके सहयोगी रवि उप्पल पर विदेश से महादेव ऑनलाइन बुक ऐप के जरिए अवैध सट्टेबाजी का बड़ा नेटवर्क संचालित करने का आरोप है।
CBI के मुताबिक, यह नेटवर्क क्रिकेट, फुटबॉल, कार्ड गेम और अन्य गतिविधियों पर सट्टा लगाने के लिए अलग-अलग पैनल और ब्रांच ऑपरेटरों का इस्तेमाल करता था।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि सट्टेबाजी से अर्जित रकम को विभिन्न बैंक खातों और हवाला नेटवर्क के जरिए विदेश भेजा जाता था। नेटवर्क को संरक्षण देने के लिए कुछ लोकसेवकों को अवैध भुगतान किए जाने के आरोपों की भी जांच की गई है।
CBI ने इस मामले में आरोपपत्र दाखिल किए हैं, जबकि ED मनी लॉन्ड्रिंग और संबंधित संपत्तियों की जांच कर रहा है।
EXCLUSIVE:-अब रायपुर में तय होगी आगे की कानूनी लड़ाई
सौरभ चंद्राकर की भारत वापसी महादेव सट्टेबाजी मामले की जांच में महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। लेकिन उसकी नागरिकता, प्रत्यर्पण की शर्तों और CBI की गिरफ्तारी की वैधता को लेकर कानूनी सवाल अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं।
अब सबकी नजर रायपुर की विशेष अदालत में होने वाली सुनवाई पर है, जहां इन विवादों को लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।
