CG News:-रावण का पुतला जलाना मानवाधिकार का उल्लंघन? दुर्योधन पर भी उठा सवाल, आयोग ने दिया ये जवाब

CG News:-रायपुर। दशहरा आते ही देशभर में रावण के पुतले का दहन किया जाता है। इसे आमतौर पर बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। लेकिन छत्तीसगढ़ राज्य मानव अधिकार आयोग के सामने इसी परंपरा को लेकर ऐसा सवाल पहुंचा, जिसने अधिकारियों को भी चौंका दिया।
शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया कि अगर हर साल रावण का पुतला जलाया जाता है, तो क्या यह उसके मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं है? और अगर रावण के पुतले का दहन बुराई के प्रतीक के तौर पर किया जाता है, तो फिर महाभारत के दुर्योधन का पुतला क्यों नहीं जलाया जाता?
CG News:-रावण और दुर्योधन को लेकर क्या था सवाल?
छत्तीसगढ़ मानव अधिकार आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष गिरधारी नायक के मुताबिक, आयोग के सामने एक आवेदन आया था, जिसमें रावण के पुतला दहन को मानवाधिकार के नजरिए से देखने का सवाल उठाया गया।
शिकायतकर्ता का तर्क था कि अगर रावण के पुतले को जलाने को लेकर मानवाधिकार का सवाल उठ सकता है, तो दुर्योधन को लेकर भी यही सवाल होना चाहिए। शिकायत में यह भी पूछा गया कि दुर्योधन को हर साल पुतला बनाकर क्यों नहीं जलाया जाता?
आयोग की ओर से शिकायतकर्ता को समझाया गया कि मानवाधिकार का कानूनी ढांचा मनुष्यों के अधिकारों से जुड़ा है, इसलिए पौराणिक पात्र रावण के पुतला दहन का मामला आयोग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।
दरअसल, Protection of Human Rights Act, 1993 में मानवाधिकारों को व्यक्ति के जीवन, स्वतंत्रता, समानता और गरिमा से जुड़े अधिकारों के रूप में परिभाषित किया गया है।
यानी यह मामला किसी पुतले को जलाने की परंपरा पर कानूनी रोक लगाने का आदेश नहीं, बल्कि आयोग के सामने आए एक असामान्य सवाल और उस पर दी गई प्रतिक्रिया से जुड़ा है।

CG News:-26 साल में करीब 74 हजार मामले आने का दावा
गिरधारी नायक के मुताबिक, छत्तीसगढ़ मानव अधिकार आयोग के गठन के बाद करीब 26 वर्षों में लगभग 74 हजार मामले सामने आए हैं। इनमें करीब 900 मामले लंबित बताए गए हैं।
उनके अनुसार आयोग के सामने आने वाले मामलों में सामाजिक बहिष्कार से जुड़े मामलों की हिस्सेदारी करीब 40 से 45 प्रतिशत है। वहीं उन्होंने करीब 3 से 4 हजार मामलों को फर्जी बताए जाने की बात भी कही।
सामाजिक बहिष्कार के मामलों में किसी व्यक्ति या परिवार से बातचीत बंद करना, सामाजिक कार्यक्रमों से अलग करना या सामाजिक और आर्थिक दबाव बनाने जैसी शिकायतें सामने आती हैं।
CG News:-1,800 सफाई कर्मचारियों की समस्याएं भी पहुंचीं आयोग तक
राजधानी रायपुर में करीब 6 हजार सफाई कर्मचारियों में से लगभग 1,800 कर्मचारियों की समस्याएं आयोग तक पहुंचने की बात कही गई है।
आयोग के मुताबिक, शिकायतों के बाद संबंधित नगरीय निकायों को नोटिस जारी किए गए और कई मामलों में समस्याओं का समाधान भी कराया गया।

CG News:-ट्रक ड्राइवरों के लिए ग्रुप इंश्योरेंस की पहल
सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के उद्देश्य से आयोग ने आरटीओ और ट्रैफिक विभाग के अधिकारियों के साथ चर्चा की है। इसमें ट्रक ड्राइवरों को सम्मानित और प्रोत्साहित करने जैसे सुझावों पर भी बात हुई।
आयोग के मुताबिक, प्रदेश में 10 से ज्यादा ट्रक रखने वाले करीब 3 हजार ट्रक मालिक हैं और उनसे जुड़े लगभग 30 हजार ट्रक ड्राइवरों का ग्रुप इंश्योरेंस कराने के लिए पत्र लिखा गया है।
CG News:-कुष्ठ रोग के नए मामलों पर भी चिंता
ग्रामीण इलाकों में कुष्ठ रोग को लेकर भी आयोग ने चिंता जताई है। आयोग के मुताबिक, पहले 3 हजार से अधिक कुष्ठ रोगियों को चिन्हित किया गया था। दोबारा जांच में करीब 1,500 नए मामले सामने आने की बात कही गई है।
आयोग ने संबंधित विभागों से इस विषय पर चर्चा कर आवश्यक कदम उठाने की बात कही है।
CG News:-बीजापुर में सरेंडर नक्सलियों से भी हुई बातचीत
मानव अधिकार आयोग की टीम ने प्रदेश के अलग-अलग जिलों में स्कूल, अस्पताल, जेल और थानों का निरीक्षण किया है। फरवरी 2026 में आयोग की टीम ने गरियाबंद, बीजापुर और कोंडागांव में ऐसे संस्थानों का दौरा किया था।
बीजापुर दौरे के दौरान आयोग की टीम ने सरेंडर कर चुके नक्सलियों से भी बातचीत की। करीब 200 सरेंडर नक्सलियों से बातचीत में 9 ऐसे लोगों की पहचान होने की बात सामने आई, जो बचपन में अनाथ हो गए थे।
आयोग ने संबंधित कलेक्टरों से ऐसे बच्चों की पहचान कर उनकी देखभाल, शिक्षा और जरूरत के मुताबिक अनाथालय जैसी संस्थाओं में व्यवस्था सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
क्यों खास है यह मामला?
मानव अधिकार आयोग में आमतौर पर जीवन, स्वतंत्रता, गरिमा, सामाजिक बहिष्कार और सरकारी तंत्र से जुड़ी शिकायतें आती हैं। ऐसे में रावण के पुतला दहन को मानवाधिकार से जोड़कर पूछा गया सवाल निश्चित तौर पर अलग तरह का मामला है।
हालांकि, उपलब्ध कानूनी परिभाषा के अनुसार मानवाधिकार व्यक्ति के जीवन, स्वतंत्रता, समानता और गरिमा से जुड़े अधिकार हैं। इसलिए इस मामले को किसी न्यायिक फैसले की बजाय आयोग के सामने आए एक असामान्य आवेदन और उस पर दिए गए जवाब के रूप में देखा जाना चाहिए।
