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Sports News:-100 घरों का गांव, 17 FIDE खिलाड़ी! शतरंज की बिसात पर गुजरात के इस गांव ने रच दी बड़ी कहानी

Sports News:-आमतौर पर शतरंज को बड़े शहरों की महंगी अकादमियों और आधुनिक ट्रेनिंग सेंटरों से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन गुजरात के महीसागर जिले का एक छोटा सा गांव इस सोच को बदल रहा है। करीब 100 घरों वाले रतुसिंह ना मुवाडा ने महज कुछ वर्षों में ग्रामीण बच्चों के बीच शतरंज की ऐसी नींव तैयार की है कि यहां से अब 17 FIDE-रेटेड खिलाड़ी सामने आ चुके हैं।

इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ा नाम सरकारी स्कूल के शिक्षक संदीप उपाध्याय का है। गणित और गुजराती पढ़ाने वाले संदीप ने वर्ष 2021 में स्कूल के बच्चों को शतरंज सिखाने की शुरुआत की थी। शुरुआत में संसाधन बेहद सीमित थे, लेकिन शिक्षक ने बच्चों की प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए अपनी जेब से शतरंज की किट, घड़ियां, किताबें, प्रतियोगिताओं की एंट्री फीस और यात्रा का खर्च तक उठाया।

Sports News:-जर्जर स्कूल से शुरू हुई शतरंज की उड़ान

रतुसिंह ना मुवाडा के बाल वाटिका सरकारी स्कूल में शतरंज का सफर उस समय शुरू हुआ, जब गांव में ज्यादातर लोग FIDE रेटिंग या ग्रैंडमास्टर जैसे शब्दों से परिचित भी नहीं थे। संदीप उपाध्याय ने बच्चों को नियमित अभ्यास कराया और धीरे-धीरे शतरंज स्कूल की पहचान बन गई।

ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 200 बच्चे अब शतरंज में आगे बढ़ने का सपना देख रहे हैं। स्कूल के बच्चों ने अब तक 120 ट्रॉफी और 179 मेडल अपने नाम किए हैं। चार साल के दौरान उन्होंने करीब 24 राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और इनमें से 22 में टॉप-3 में जगह बनाई।

Sports News:-शिक्षक ने अपनी कमाई बच्चों के सपनों पर लगाई

संदीप उपाध्याय की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने बच्चों को केवल स्कूल में खेल सिखाने तक सीमित नहीं रखा। जिन परिवारों के लिए प्रतियोगिता की फीस और बाहर जाने का खर्च उठाना मुश्किल था, उनके बच्चों की मदद उन्होंने अपनी सैलरी से की।

बच्चों को अंग्रेजी में उपलब्ध शतरंज की सामग्री समझने में परेशानी न हो, इसके लिए उन्होंने ‘द मैग्नस मेथड’ जैसी किताब की सामग्री को गुजराती में समझाने का प्रयास भी किया। स्कूल में अब बच्चों के लिए ऑनलाइन शतरंज अभ्यास और रणनीति सीखने की सुविधाएं भी विकसित हुई हैं।

Sports News:-गांव के बच्चों को मिला बाहर से भी सहारा

सितंबर 2025 में सामने आई रिपोर्ट के बाद इस अनोखी पहल को देशभर से समर्थन मिलने लगा। ताजा जानकारी के अनुसार बेंगलुरु के राजीव तलवार और चेन्नई के कैलाश रंगनाथन ने बच्चों की शतरंज यात्रा के लिए करीब 8 लाख रुपये का योगदान दिया। इसके अलावा अमेरिका की संस्था Gift of Chess ने स्कूल को 500 शतरंज सेट उपलब्ध कराए। इनमें से कई सेट आसपास के सरकारी स्कूलों में भी बांटे जा रहे हैं, ताकि दूसरे ग्रामीण इलाकों के बच्चे भी इस खेल से जुड़ सकें।

Sports News:-दिव्या चौहान बनीं गांव की नई उम्मीद

गांव की प्रतिभाशाली खिलाड़ियों में दिव्या चौहान का नाम भी प्रमुखता से सामने आया है। खेत मजदूर परिवार से आने वाली दिव्या ने तालुका स्तर की प्रतियोगिताओं में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है और राज्य महिला रैपिड चैंपियनशिप में तीसरा स्थान हासिल किया था।

ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, दिव्या अब कक्षा 8 में पढ़ रही हैं और उन्हें महाराष्ट्र के त्र्यंबकेश्वर के पास विशेष आवासीय शतरंज प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए भी चुना गया है। इससे पहले वह गुजरात की ओर से नेशनल स्कूल चेस चैंपियनशिप में भी खेल चुकी हैं।

Sports News:-अब गांव में बनेगा बड़ा शतरंज केंद्र?

बच्चों की लगातार सफलता के बाद रतुसिंह ना मुवाडा को एक बड़े शतरंज केंद्र के रूप में विकसित करने की कोशिश भी शुरू हो गई है। शिक्षक संदीप उपाध्याय की इच्छा है कि यहां देश का एक बड़ा सरकारी सहायता प्राप्त शतरंज स्कूल तैयार हो, जहां ग्रामीण बच्चों को बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाएं मिल सकें।

यानी जिस गांव में कभी शतरंज के अंतरराष्ट्रीय स्तर की रेटिंग का नाम तक अनजान था, वहां आज बच्चे FIDE रेटिंग, राष्ट्रीय प्रतियोगिता और ग्रैंडमास्टर बनने के सपने देख रहे हैं। रतुसिंह ना मुवाडा की कहानी साबित करती है कि प्रतिभा को अगर सही मार्गदर्शन और अवसर मिल जाए, तो बड़ी अकादमी नहीं बल्कि एक समर्पित शिक्षक भी चैंपियन तैयार कर सकता है।

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