रायपुर

Cricket Stadium:-रायपुर इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम पर NGT की सख्ती! अब बिना मंजूरी नहीं होगा कोई मैच, जल संरक्षण नियमों की अनदेखी पड़ी भारी

Cricket Stadium:-रायपुर। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने भूजल संरक्षण और जल प्रबंधन नियमों के पालन में लापरवाही बरतने वाले देश के तीन प्रमुख अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियमों पर बड़ा एक्शन लिया है। अंतरिम आदेश जारी करते हुए रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम, मुंबई के डॉ. डी.वाई. पाटिल स्टेडियम और जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में NGT की पूर्व अनुमति के बिना किसी भी खेल गतिविधि के आयोजन पर रोक लगा दी गई है।

NGT ने अपने आदेश में कहा कि देश के कई हिस्सों में लगातार बढ़ रहे जल संकट को देखते हुए बड़े खेल परिसरों की जिम्मेदारी है कि वे भूजल के उपयोग को नियंत्रित करें और रेन वाटर हार्वेस्टिंग, रीसाइकल्ड पानी तथा अन्य जल संरक्षण उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करें। अधिकरण ने पाया कि संबंधित स्टेडियमों में इन व्यवस्थाओं को लेकर पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई और कई मामलों में नियमों का पालन भी संतोषजनक नहीं पाया गया।

Cricket Stadium:-बार-बार नोटिस के बाद भी नहीं मिला जवाब

NGT के अनुसार, केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (CGWA) और अधिकरण की ओर से कई बार नोटिस जारी किए गए थे। इसके बावजूद रायपुर, जयपुर और मुंबई के स्टेडियमों ने समय पर अपना जवाब दाखिल नहीं किया। इसी कारण अधिकरण ने अंतरिम प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया। मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को होगी।

Cricket Stadium:-अप्रैल में मांगी गई थी जल उपयोग की पूरी जानकारी

गौरतलब है कि अप्रैल 2026 में NGT ने देश के प्रमुख क्रिकेट स्टेडियमों से मैदान और पिचों के रखरखाव में इस्तेमाल होने वाले पानी के स्रोत, भूजल उपयोग, रेन वाटर हार्वेस्टिंग और जल पुनर्चक्रण (Water Recycling) की विस्तृत जानकारी मांगी थी। इस सूची में रायपुर, नई दिल्ली का अरुण जेटली स्टेडियम, लखनऊ का इकाना स्टेडियम, कटक का बाराबती स्टेडियम, जयपुर का सवाई मानसिंह स्टेडियम और मुंबई का डी.वाई. पाटिल स्टेडियम शामिल थे। इनमें कुछ स्टेडियम जवाब दाखिल कर चुके हैं, जबकि कुछ ने अतिरिक्त समय मांगा है।

Cricket Stadium:-पर्यावरण संरक्षण पर सख्त संदेश

विशेषज्ञों का मानना है कि NGT का यह आदेश सिर्फ तीन स्टेडियमों तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर के खेल परिसरों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि भविष्य में भूजल दोहन, वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण से जुड़े पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी करने पर कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

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