राजनीति

Bengal Politics:-‘दीदी’ का टूटा सपना! स्टेडियम से हटाया गया ‘बिस्वा बांग्ला’ लोगो, ममता बोलीं- FIFA ने भी की थी तारीफ

Bengal Politics:-पश्चिम बंगाल की राजधानी Kolkata के सॉल्ट लेक स्थित Vivekananda Yuba Bharati Krirangan के बाहर लगा चर्चित ‘बिस्वा बांग्ला’ लोगो हटाए जाने के बाद राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। इस फैसले को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने गहरी नाराजगी जाहिर की है।

ममता बनर्जी ने कहा कि यह लोगो सिर्फ एक डिज़ाइन नहीं था, बल्कि बंगाल की संस्कृति, कला और पहचान का प्रतीक बन चुका था। उन्होंने दावा किया कि इस लोगो को तैयार कराने में उनकी व्यक्तिगत भूमिका रही थी और इसे एक कलाकार की मदद से डिजाइन कराया गया था।

Bengal Politics:-मुख्यमंत्री ने भावुक अंदाज में कहा,
“लोग वहां तस्वीरें लेते थे, युवाओं और खेल प्रेमियों के लिए यह आकर्षण का केंद्र था। उसे इस तरह हटाया जाना दुखद है। यह बंगाल की आत्मा से जुड़ा प्रतीक था।”

Bengal Politics:-FIFA का भी किया जिक्र

FIFA का हवाला देते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि अंडर-17 फुटबॉल टूर्नामेंट के दौरान आई फीफा टीम ने भी स्टेडियम परिसर और ‘बिस्वा बांग्ला’ ब्रांडिंग की सराहना की थी। उनके मुताबिक, इस लोगो ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बंगाल को अलग पहचान दिलाई थी।

Bengal Politics:-TMC ने BJP पर साधा निशाना

All India Trinamool Congress नेताओं ने इस कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना बताया है। पार्टी का आरोप है कि भाजपा राज्य सरकार की उपलब्धियों और बंगाली अस्मिता से जुड़े प्रतीकों को खत्म करने की कोशिश कर रही है।

हालांकि प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि स्टेडियम और आसपास के इलाकों के सौंदर्यीकरण अभियान के तहत यह बदलाव किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, अब खेल और राष्ट्रीय पहचान से जुड़े नए प्रतीकों को प्राथमिकता दी जा रही है।

Bengal Politics:-फाल्टा सीट पर BJP की बड़ी जीत

इसी बीच पश्चिम बंगाल की राजनीति में Bharatiya Janata Party को बड़ी सफलता मिली है। फाल्टा सीट पर हुए चुनाव में भाजपा उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने एक लाख से अधिक वोटों के अंतर से जीत दर्ज की है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक यह इलाका लंबे समय से Abhishek Banerjee और तृणमूल कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है।

भाजपा की इस जीत को राज्य की बदलती राजनीतिक हवा और बंगाल में बढ़ते राजनीतिक मुकाबले के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

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