
Manipur Violence:-मणिपुर में जारी हिंसा और हालात को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पिछले पांच वर्षों से मणिपुर के प्रति गंभीर नहीं रही, जिसका सीधा असर राज्य की सुरक्षा व्यवस्था और अर्थव्यवस्था पर पड़ा है।
कांग्रेस के मणिपुर प्रभारी क्रिस्टोफर तिलक ने रविवार को यह आरोप लगाए। वे मणिपुर में हिंसा प्रभावित इलाकों का दौरा करने और पार्टी के ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ अभियान में हिस्सा लेने पहुंचे थे।
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“मणिपुर के हालात बेहद दुर्भाग्यपूर्ण” – तिलक
पत्रकारों से बातचीत में क्रिस्टोफर तिलक ने कहा कि
“पिछले पांच सालों में केंद्र सरकार ने मणिपुर को जिम्मेदारी से नहीं संभाला। राज्य की अर्थव्यवस्था कमजोर हो चुकी है और अब सुरक्षा, खासकर सीमा सुरक्षा, एक बड़ी चिंता बन गई है।”
उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति शासन के बावजूद राज्य में हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं।
Manipur Violence:-सामूहिक दुष्कर्म पीड़िता की 32 महीने बाद मौत
मणिपुर हिंसा से जुड़ा एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है।
मई 2023 में जातीय हिंसा के दौरान कुकी समुदाय की एक युवती सामूहिक दुष्कर्म का शिकार हुई थी। अब करीब 32 महीनों बाद उसकी मौत हो गई।
परिजनों के अनुसार,
- घटना के बाद युवती कभी मानसिक और शारीरिक रूप से उबर नहीं पाई
- गंभीर चोटों और गहरे सदमे ने उसकी सेहत को पूरी तरह तोड़ दिया
- इलाज के लिए उसे गुवाहाटी ले जाया गया था
इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम (ITLF) के मुताबिक, युवती की मौत 10 जनवरी 2026 को गुवाहाटी में हुई।
मणिपुर हिंसा:
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| हिंसा की शुरुआत | मई 2023 |
| समुदाय | मैतेई बनाम कुकी |
| मौतें | लगभग 260 |
| बेघर लोग | हजारों |
| राष्ट्रपति शासन | फरवरी 2025 से |
| मुख्यमंत्री इस्तीफा | एन. बीरेन सिंह |
केंद्र मणिपुर को लेकर गंभीर नहीं – कांग्रेस
कांग्रेस नेता तिलक ने आरोप लगाया कि
- राष्ट्रपति शासन के दौरान भी भूमिगत संगठनों ने बंद बुलाया
- इससे साफ है कि हालात अब भी नियंत्रण में नहीं हैं
उन्होंने बताया कि वे अपने दौरे के दौरान
- घाटी और पहाड़ी दोनों क्षेत्रों में जाएंगे
- ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ को सभी विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंचाएंगे
Manipur Violence:-मनरेगा को लेकर कांग्रेस का बड़ा अभियान
कांग्रेस ने 3 जनवरी को ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ अभियान की घोषणा की थी, जो
10 जनवरी से 25 फरवरी तक चलेगा।
अभियान की प्रमुख मांगें
| मांग | विवरण |
|---|---|
| कानून की बहाली | मनरेगा को अधिकार आधारित कानून बनाया जाए |
| नाम परिवर्तन का विरोध | योजना का नाम बदलने का विरोध |
| पंचायत अधिकार | पंचायतों को मजबूत किया जाए |
| रोजगार का अधिकार | ग्रामीणों को सुनिश्चित काम |
तिलक ने याद दिलाया कि
“2005 में यूपीए सरकार ने मनरेगा लाकर गरीबों और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त किया था।”
