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Iran US Conflict:-क्या सच में अमेरिका ने ईरान को दी थी “14 हजार करोड़ की फिरौती”? जानिए 1.7 अरब डॉलर का पूरा सच

Iran US Conflict:-अमेरिका और ईरान के बीच 1.7 अरब डॉलर (करीब 14 हजार करोड़ रुपये) के भुगतान को लेकर फिर से विवाद गरमा गया है।
अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने इस रकम को “फिरौती” बताया, जबकि Barack Obama के प्रशासन का कहना है कि यह एक पुराना बकाया भुगतान था।
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Iran US Conflict:-पूरा मामला
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| कुल रकम | 1.7 अरब डॉलर (₹14,000 करोड़ लगभग) |
| मूल राशि | 400 मिलियन डॉलर |
| ब्याज | 1.3 अरब डॉलर |
| भुगतान का समय | 2016 (ओबामा सरकार) |
| विवाद का कारण | कैश में विमान से भेजा गया पैसा |
Iran US Conflict:-पैसा क्यों दिया गया था?
- यह पैसा कोई नई मदद या “रिश्वत” नहीं था
- 1979 से पहले ईरान ने अमेरिका को हथियार खरीदने के लिए एडवांस दिया था
- लेकिन Iranian Revolution के बाद डील रद्द हो गई
- अमेरिका ने न हथियार दिए, न तुरंत पैसा लौटाया
- यही पैसा दशकों बाद ब्याज सहित वापस किया गया
Iran US Conflict:-कैश में क्यों भेजा गया पैसा?
- उस समय ईरान पर बैंकिंग प्रतिबंध (Sanctions) थे
- इसलिए बैंक ट्रांसफर संभव नहीं था
- पैसा यूरो/स्विस फ्रैंक में हवाई जहाजों से भेजा गया
- इसी वजह से “Plane full of cash” वाली चर्चा शुरू हुई
Iran US Conflict:-विवाद क्यों हुआ?
– ट्रंप का आरोप:
- यह पैसा “ईरान को खुश करने” और “वफादारी खरीदने” के लिए दिया गया
- इसे उन्होंने “रैंसम (फिरौती)” कहा
-ओबामा प्रशासन का जवाब:
- यह एक कानूनी समझौता (Legal Settlement) था
- कोर्ट केस हारने पर अमेरिका को और ज्यादा पैसा देना पड़ सकता था
- इसे बंधक रिहाई से अलग बताया गया
JCPOA डील क्या थी?
पूरा नाम: Joint Comprehensive Plan of Action (2015)
इसमें क्या तय हुआ था:
- ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करेगा
- अंतरराष्ट्रीय जांच की अनुमति देगा
- 15 साल तक सख्त नियम मानेगा
-बदले में:
- आर्थिक प्रतिबंध हटाए गए
- तेल निर्यात और व्यापार की छूट मिली
-लेकिन 2018 में Donald Trump ने इस डील से अमेरिका को बाहर निकाल लिया
Iran US Conflict:-1979 की क्रांति और विवाद की जड़
- ईरान में पहले शाह का शासन था, जो अमेरिका के करीबी थे
- जनता में असंतोष बढ़ा
- धार्मिक नेता Ruhollah Khomeini के नेतृत्व में क्रांति हुई
- ईरान इस्लामिक रिपब्लिक बना
– इसके बाद:
- अमेरिकी दूतावास पर कब्जा
- 52 अमेरिकी नागरिक 444 दिन तक बंधक
- दोनों देशों के रिश्ते दुश्मनी में बदल गए
