India US Trade:-अमेरिका से आने वाली दालों पर मोदी सरकार का बड़ा फैसला, 30% आयात शुल्क लागू

India US Trade:-भारत की रसोई में दाल केवल भोजन नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जरूरत है। लेकिन जब यही दालें अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कूटनीति का हिस्सा बन जाती हैं, तो असर आम लोगों से लेकर किसानों तक पड़ता है।
मोदी सरकार ने अमेरिका से आयात होने वाली कुछ प्रमुख दालों पर 30 प्रतिशत आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने का फैसला किया है। यह कदम भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में एक अहम मोड़ माना जा रहा है।
भारत-अमेरिका व्यापार में दालें क्यों अहम हैं?
भारत दुनिया में दालों का सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है।
वैश्विक स्तर पर होने वाली कुल दाल खपत का करीब 27% हिस्सा अकेले भारत का है।
हालांकि, अनियमित मानसून और सीमित खेती योग्य जमीन के कारण देश में उत्पादन कई बार मांग से कम रह जाता है। इसी वजह से भारत को हर साल बड़ी मात्रा में दालें आयात करनी पड़ती हैं।
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India US Trade:-अमेरिका से भारत कौन-कौन सी दालें मंगवाता है?
पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका भारत के लिए दालों का एक बड़ा सप्लायर बनकर उभरा है।
अमेरिका से आयात होने वाली प्रमुख दालें
| दाल का नाम | उपयोग |
|---|---|
| यलो पीज (पीली मटर) | घरेलू भोजन, प्रोसेस्ड फूड |
| मसूर दाल | रोजमर्रा की खपत |
| चना | खाद्य उद्योग, स्नैक्स |
| सूखी फलियां | फूड प्रोसेसिंग |
-अमेरिकी दालें गुणवत्ता में अच्छी मानी जाती हैं, लेकिन कीमत हमेशा एक चुनौती रही है।
30% टैरिफ लगाने का फैसला क्यों?
सरकार ने नवंबर 2025 से अमेरिका से आने वाली दालों पर 30% आयात शुल्क लागू कर दिया है।
माना जा रहा है कि यह कदम अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर लगाए गए ऊंचे टैरिफ के जवाब में उठाया गया है।
सरकार का साफ संदेश है —
“घरेलू किसानों और भारतीय बाजार के हितों से कोई समझौता नहीं होगा।”
India US Trade:-अमेरिकी दालें क्यों हुईं महंगी?
30% टैरिफ के बाद अमेरिकी दालों की कीमत भारतीय बाजार में काफी बढ़ गई है।
इसका नतीजा यह हुआ कि अब भारतीय आयातक कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, रूस और अफ्रीकी देशों से सस्ती दालें खरीदने की ओर बढ़ रहे हैं।
2026 की शुरुआत में अमेरिका से दालों के आयात में गिरावट दर्ज की गई है।
अमेरिकी किसानों पर पड़ा सीधा असर
भारत जैसे बड़े बाजार से मांग घटने का असर अमेरिकी किसानों पर साफ दिखने लगा है।
- मसूर और चने की कीमतों में 10–15% तक गिरावट
- छोटे और मध्यम किसानों की आमदनी पर दबाव
- उत्पादन लागत बढ़ने से चिंता और बढ़ी
ग्रामीण अमेरिका में बढ़ती चिंता
नॉर्थ डकोटा और मोंटाना जैसे राज्यों में दालों की खेती बड़े पैमाने पर होती है।
अनुमान है कि अगर यह टैरिफ लंबे समय तक जारी रहा, तो अमेरिकी किसानों को हर साल 5 से 10 करोड़ डॉलर तक का नुकसान हो सकता है।
इससे ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी और आर्थिक संकट बढ़ने की आशंका है।
भारत की दालों में आत्मनिर्भरता की तैयारी
भारत सरकार दालों में आत्मनिर्भर बनने के लिए तेजी से कदम उठा रही है।
दलहन आत्मनिर्भरता मिशन (2025–31)
| विवरण | आंकड़े |
|---|---|
| कुल बजट | ₹11,440 करोड़ |
| मौजूदा उत्पादन | 24.2 मिलियन टन |
| लक्ष्य उत्पादन | 35 मिलियन टन |
सरकार का उद्देश्य है —
-उत्पादन बढ़ाना
-किसानों की आय बढ़ाना
-आयात पर निर्भरता घटाना
फिर भी आयात क्यों जरूरी है?
इन सभी प्रयासों के बावजूद भारत अभी भी दालों का बड़ा आयातक बना हुआ है।
2024–25 में रिकॉर्ड 73 लाख टन दालों का आयात
देश की कुल खपत का करीब 15–18% हिस्सा अभी भी आयात से पूरा होता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि
-कीमतों को नियंत्रण में रखने और आपूर्ति संतुलन के लिए आयात फिलहाल जरूरी है,
-लेकिन ज्यादा निर्भरता घरेलू किसानों के लिए नुकसानदेह हो सकती है।
