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Digital Arrest Scam:-‘मोबाइल पर गिरफ्तारी, खाते से करोड़ों साफ!’ डिजिटल डकैतों पर सुप्रीम कोर्ट का गुस्सा, जमानत पर भी उठाए सवाल; 8 महीने में ₹647 करोड़ की ठगी

Digital Arrest Scam:- न पुलिस घर पहुंची, न हथकड़ी लगी, फिर भी लोग घंटों तक गिरफ्तारी के डर में कैद रहे और जिंदगीभर की कमाई गंवा बैठे। देश में तेजी से फैल रहे डिजिटल अरेस्ट के जाल पर अब सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इस तरह की साइबर ठगी को ‘डिजिटल डकैती’ करार देते हुए आरोपियों की जमानत पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि साल 2026 के शुरुआती आठ महीनों में ही डिजिटल अरेस्ट से जुड़ी 21,900 से ज्यादा शिकायतें सामने आई हैं, जिनमें 647 करोड़ रुपये से अधिक की रकम शामिल है।

Digital Arrest Scam:-‘ये सिर्फ ठगी नहीं, डिजिटल डकैती है’ — सुप्रीम कोर्ट

28 अक्टूबर को चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने साइबर अपराध से जुड़े एक मामले की सुनवाई की। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे।

सुनवाई के दौरान अदालत ने बुजुर्गों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को निशाना बनाने वाले साइबर अपराधियों पर गहरी नाराजगी जताई। चीफ जस्टिस ने आरोपियों की जमानत को लेकर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे अपराधों से निपटने के लिए कानून के तहत उपलब्ध कठोर उपाय अपनाए जाने चाहिए।

हालांकि, अदालत की ये मौखिक टिप्पणियां थीं। सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट के सभी मामलों में जमानत पर कोई सार्वभौमिक प्रतिबंध नहीं लगाया है।

Digital Arrest Scam:-12 राज्यों में 35 केस, आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत

मामले में दो आरोपियों गौरव कुमार साहा और निधि भंडारी के खिलाफ देश के 12 राज्यों में कुल 35 आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई।

आरोप है कि उनकी कंपनी के बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से प्राप्त रकम जमा करने के लिए किया गया। आरोपियों ने अलग-अलग राज्यों में दर्ज मामलों को एक साथ जोड़ने की मांग की थी।

लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग पर विचार करने से इनकार कर दिया। अदालत ने सवाल उठाया कि आरोपियों की सुविधा के लिए पीड़ितों और जांच एजेंसियों को परेशानी क्यों उठानी चाहिए? इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका वापस ले ली।

Digital Arrest Scam:-81 साल के बुजुर्ग से ठगे ₹1.90 करोड़

सुनवाई के दौरान केरल के एर्नाकुलम का एक चौंकाने वाला मामला भी सामने आया। यहां 81 वर्षीय बुजुर्ग से कथित तौर पर 1 करोड़ 90 लाख रुपये की साइबर ठगी हुई।

अदालत के सामने बताया गया कि ठगी की रकम आरोपियों से जुड़े बैंक खाते में जमा हुई थी। इस मामले का जिक्र करते हुए कोर्ट ने बुजुर्गों की जीवनभर की जमा पूंजी लूटने वाले गिरोहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत बताई।

Digital Arrest Scam:-सिर्फ 8 महीने में ₹647 करोड़! आंकड़े देखकर उड़ जाएंगे होश

केंद्रीय गृह मंत्रालय और भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश रिपोर्ट में डिजिटल अरेस्ट से जुड़ी ठगी के बड़े आंकड़े सामने आए हैं।

अवधिशिकायतेंठगी में शामिल रकम
20241,23,672₹1,935 करोड़
202558,239₹1,211 करोड़
जनवरी–अगस्त 202621,900 से अधिक₹647 करोड़ से अधिक

ये आंकड़े बताते हैं कि शिकायतों की संख्या में कमी आने के बावजूद साइबर अपराधियों का खतरा खत्म नहीं हुआ है। वर्ष 2026 के आंकड़े केवल शुरुआती आठ महीनों के हैं। India News+1

ठगी की रकम वापस दिलाने की कोशिश, CBI भी एक्शन में

डिजिटल अरेस्ट के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी के बीच केंद्र सरकार, बैंक और जांच एजेंसियां भी कार्रवाई कर रही हैं।

सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, साइबर ठगी के पीड़ितों को रकम वापस दिलाने के लिए मनी रिस्टोरेशन पोर्टल के जरिए कार्रवाई की जा रही है। रिपोर्ट में 332.7 करोड़ रुपये की राशि से संबंधित बहाली आदेशों और बैंक स्तर पर पीड़ितों को 112.96 करोड़ रुपये लौटाए जाने का उल्लेख है।

वहीं, 1 दिसंबर 2025 के बाद से CBI ने संबंधित मामलों में 49 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है और 140 से अधिक आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है।

Digital Arrest Scam:-आखिर कैसे होता है डिजिटल अरेस्ट का खेल?

साइबर ठग खुद को पुलिस, CBI, ED या दूसरी जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को फोन करते हैं। इसके बाद मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स पार्सल या किसी गंभीर अपराध में नाम आने का डर दिखाया जाता है।

कई बार वीडियो कॉल पर नकली पुलिस स्टेशन, फर्जी पहचान पत्र और गिरफ्तारी वारंट भी दिखाए जाते हैं। पीड़ित को बताया जाता है कि वह डिजिटल अरेस्ट में है और किसी से बात नहीं कर सकता।

इसके बाद जांच या सत्यापन के नाम पर बैंक खाते से रकम ट्रांसफर करवा ली जाती है।

ध्यान रखें, भारत में पुलिस या कोई जांच एजेंसी वीडियो कॉल के जरिए इस तरह का डिजिटल अरेस्ट नहीं करती।

Digital Arrest Scam:-एक फोन कॉल से खाली हो सकता है बैंक खाता, ऐसे रहें सावधान

  • पुलिस या जांच अधिकारी बनकर कोई पैसे मांगे तो तुरंत सतर्क हो जाएं।
  • अनजान व्यक्ति को OTP, बैंक डिटेल या स्क्रीन शेयरिंग की अनुमति न दें।
  • गिरफ्तारी की धमकी मिलने पर कॉल काटकर संबंधित एजेंसी से आधिकारिक माध्यम से संपर्क करें।
  • ठगी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें।
  • राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

Digital Arrest Scam:-सबसे बड़ा सवाल — आखिर कब रुकेगी डिजिटल डकैती?

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों ने एक बार फिर डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते खतरे को सामने ला दिया है। खासकर बुजुर्ग और रिटायर्ड लोग ऐसे गिरोहों के निशाने पर हैं, जिनकी जीवनभर की बचत कुछ ही घंटों में गायब हो सकती है।

अब चुनौती सिर्फ अपराधियों को गिरफ्तार करने की नहीं, बल्कि ठगी की रकम को जल्द रोकने, पीड़ितों को उनका पैसा वापस दिलाने और ऐसे अपराधों को शुरू होने से पहले रोकने की भी है।

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