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UN Experts:-रुबियो का भारत के विरोध प्रदर्शनों पर दो टूक जवाब, UN एक्सपर्ट्स पर तंज कसकर बोले- यह हमारा नहीं, भारत का मामला

UN Experts:-भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों की टिप्पणी पर अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस मुद्दे को भारत का आंतरिक राजनीतिक मामला बताते हुए कहा कि अमेरिका इसमें दखल नहीं देगा। साथ ही उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों की विश्वसनीयता पर भी तंज कसा।

UN Experts:-‘UN एक्सपर्ट्स’ शब्द ही विरोधाभास है: रुबियो

21 अक्टूबर को पत्रकारों से बातचीत के दौरान रुबियो से भारत में विपक्षी दलों और छात्र संगठनों के विरोध प्रदर्शनों को लेकर सवाल पूछा गया। इस पर उन्होंने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां चुनाव होते हैं और लोगों को अपनी राय रखने का अधिकार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह भारत के घरेलू राजनीतिक मामलों पर टिप्पणी नहीं करना चाहते।

संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों की आलोचना पर कटाक्ष करते हुए रुबियो ने ‘UN एक्सपर्ट्स’ शब्द को ही विरोधाभास बताया। उनके इस बयान को भारत में प्रदर्शनों से जुड़े मामले पर संयुक्त राष्ट्र की टिप्पणी से दूरी बनाने के रूप में देखा जा रहा है।

UN Experts:-शांतिपूर्ण प्रदर्शन और हिंसा में अंतर पर दिया जोर

रुबियो ने लोकतंत्र में विरोध और असहमति की भूमिका पर भी बात की। उन्होंने कहा कि लोगों का सार्वजनिक रूप से अपनी राय रखना और राजनीतिक मतभेद जाहिर करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है। हालांकि, उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन और तोड़फोड़ या आगजनी जैसी हिंसक घटनाओं के बीच अंतर स्पष्ट किया।

उन्होंने यूरोप में होने वाली हिंसक घटनाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि इमारतों में घुसना, तोड़फोड़ करना और आग लगाना अलग तरह की स्थिति है। रुबियो ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी यह टिप्पणी भारत के प्रदर्शनों को सीधे तौर पर हिंसक बताने के लिए नहीं थी।

UN Experts:-क्यों हो रहे हैं भारत में प्रदर्शन?

भारत में हालिया प्रदर्शनों के पीछे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग प्रमुख मुद्दा है। विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने से पात्र मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।

दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य मृत, स्थानांतरित, डुप्लिकेट और अन्य अपात्र मतदाताओं के नाम हटाकर मतदाता सूची को दुरुस्त करना है। आयोग के अनुसार, जिन पात्र मतदाताओं के नाम गलती से हट गए हैं, उनके पास आपत्ति और अपील का विकल्प मौजूद है।

UN Experts:-UN विशेषज्ञों ने क्या चिंता जताई?

संयुक्त राष्ट्र के दो दर्जन से अधिक स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने 20 अक्टूबर को भारतीय अधिकारियों से प्रदर्शनों के दौरान कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की थी। विशेषज्ञों ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर बल प्रयोग, लाठीचार्ज और मनमानी हिरासत जैसी घटनाएं सामने आई हैं।

उन्होंने अधिकारियों से जरूरत से ज्यादा बल के इस्तेमाल को रोकने और शांतिपूर्ण सभा के अधिकार की रक्षा करने की अपील की। ये आरोप संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों की ओर से जताई गई चिंताएं हैं; इन्हें किसी स्वतंत्र जांच में सिद्ध हो चुके निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

UN Experts:-भारत ने भी जताई आपत्ति

संयुक्त राष्ट्र की टिप्पणियों के बीच भारत ने भी मानवाधिकारों के मुद्दे को राजनीतिक दबाव बनाने या चुनिंदा देशों को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने पर आपत्ति जताई है। भारत का कहना है कि अपुष्ट आरोपों और अधूरे आंकड़ों के आधार पर देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की नकारात्मक तस्वीर पेश करना उचित नहीं है।

रुबियो के बयान से स्पष्ट है कि अमेरिका इस विवाद पर भारत की घरेलू राजनीति में सार्वजनिक रूप से पक्ष लेने से बच रहा है। वहीं, प्रदर्शनकारियों के आरोपों, पुलिस की कार्रवाई और मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर उठे सवालों पर बहस जारी है।

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