CGPSC Scam:-CGPSC केस में टामन सिंह सोनवानी को झटका, हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत

CGPSC Scam:-छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आयोग के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी को बड़ा झटका लगा है। आपके उपलब्ध विवरण के मुताबिक, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। मामले की सुनवाई जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकल पीठ में हुई। अदालत ने प्रथम दृष्टया उपलब्ध साक्ष्यों और धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 45 के प्रावधानों को जमानत के फैसले में महत्वपूर्ण माना।
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CGPSC Scam:-ईडी ने किया जमानत का विरोध
टामन सिंह सोनवानी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 483 के तहत नियमित जमानत की मांग की थी। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इसका विरोध करते हुए भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और उनसे जुड़े वित्तीय लेनदेन का हवाला दिया। इससे पहले रायपुर की विशेष अदालत भी उनकी जमानत याचिका खारिज कर चुकी थी।
यह मामला CGPSC की वर्ष 2020 और 2021 की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। भर्ती प्रक्रिया को लेकर आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW/ACB) ने फरवरी 2024 में प्राथमिकी दर्ज की थी। बाद में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने भी मामले की जांच की और आरोपपत्र तथा पूरक आरोपपत्र दाखिल किए।
CGPSC Scam:-भर्ती नियमों में बदलाव और CSR राशि पर सवाल
ईडी के आरोपों के मुताबिक, 14 जुलाई 2021 को भर्ती नियमों में बदलाव किया गया, जिसके बाद परिवार की परिभाषा से ‘भतीजे’ शब्द हटा दिया गया। जांच एजेंसी का दावा है कि इस बदलाव से सोनवानी के भतीजों नितेश सोनवानी और साहिल सोनवानी को क्रमशः डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी के पद पर चयन का लाभ मिला। हालांकि, ये आरोप हैं और इन पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष को दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।
जांच एजेंसी ने बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड की ओर से ग्रामीण विकास समिति को कथित शैक्षणिक परियोजना के लिए दिए गए 45 लाख रुपये के CSR योगदान पर भी सवाल उठाए हैं। ईडी का दावा है कि 33 से अधिक अभ्यर्थियों से लगभग तीन करोड़ रुपये जुटाए गए और कथित अपराध की कुल आय करीब 3.45 करोड़ रुपये रही।
CGPSC Scam:-तलाशी में नकदी और डिजिटल सामग्री जब्त करने का दावा
ईडी के मुताबिक, 3 जून 2026 को की गई तलाशी के दौरान दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, डिजिटल सामग्री और 8.45 लाख रुपये नकद जब्त किए गए। एजेंसी ने कथित अपराध की आय से जुड़ी कुछ संपत्तियों के संबंध में 21 सितंबर 2026 को अस्थायी कुर्की आदेश जारी करने की भी जानकारी दी है।
इसके बाद 22 सितंबर 2026 को ईडी ने सोनवानी समेत सात आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल की। इस शिकायत के जरिए एजेंसी ने मामले में अपनी जांच के निष्कर्ष अदालत के समक्ष रखे हैं। आरोपों पर आगे की कानूनी प्रक्रिया और न्यायिक परीक्षण महत्वपूर्ण होंगे।
CGPSC Scam:-बचाव पक्ष ने क्या दलील दी?
सोनवानी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील ओटवानी ने दलील दी कि जांच एजेंसियों के पास संबंधित दस्तावेज और बैंक लेनदेन पहले से उपलब्ध हैं। बचाव पक्ष के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद ऐसी कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई, जो जमानत देने से इनकार करने का पर्याप्त आधार बने।
दूसरी ओर, ईडी ने कथित वित्तीय लेनदेन और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जमानत का विरोध किया। अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करते हुए जमानत के लिए PMLA की धारा 45 के तहत निर्धारित शर्तों को महत्वपूर्ण माना।
CGPSC Scam:-मेडिकल आधार पर भी नहीं मिला पर्याप्त आधार
जमानत पर विचार करते समय मेडिकल स्थिति से जुड़े पहलू पर भी चर्चा हुई। अदालत के अवलोकन के अनुसार, मेडिकल आधार पर राहत के लिए ऐसे पर्याप्त साक्ष्य जरूरी हैं, जिनसे यह सामने आए कि हिरासत में आवश्यक उपचार उपलब्ध नहीं हो पा रहा है या आरोपी की जान को खतरा है। उपलब्ध रिकॉर्ड में इस संबंध में पर्याप्त मेडिकल सामग्री नहीं पाई गई।
इस मामले में जमानत खारिज होने का अर्थ यह नहीं है कि आरोप अंतिम रूप से सिद्ध हो गए हैं। मामले में अभियोजन के आरोपों का परीक्षण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होना बाकी है।
