छत्तीसगढ़

Chhattisgarh Tourism:-छत्तीसगढ़ में राम वनगमन परिपथ का होगा कायाकल्प, 3 चरणों में बदलेगी धार्मिक पर्यटन स्थलों की तस्वीर

Chhattisgarh Tourism:-छत्तीसगढ़ में भगवान श्रीराम से जुड़ी धार्मिक और ऐतिहासिक मान्यताओं वाले स्थलों को विकसित करने की तैयारी तेज हो गई है। राज्य सरकार राम वनगमन पर्यटन परिपथ का विकास तीन चरणों में करने की योजना पर काम कर रही है। पहले चरण में 10 प्रमुख स्थलों को विकसित करने की योजना है, जबकि शोध के आधार पर चिह्नित कुल 31 स्थलों को इस परियोजना से जोड़ा जाएगा। सरकार का लक्ष्य धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने विभागीय योजनाओं की समीक्षा के दौरान राम वनगमन पर्यटन परिपथ से जुड़े कार्यों को समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए हैं। अक्टूबर 2026 में जारी विभागीय जानकारी के अनुसार, नए चिह्नित 31 स्थलों पर विकास कार्य शुरू करने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR), निविदा और कार्य एजेंसी के चयन जैसी प्रक्रियाएं दो महीने के भीतर पूरी करने को कहा गया है। हालांकि, यह समय-सीमा प्रक्रियाएं पूरी करने के निर्देश से संबंधित है, सभी निर्माण कार्यों की पूर्णता की अलग-अलग स्थिति की पुष्टि जरूरी है।

Chhattisgarh Tourism:-पहले चरण में इन धार्मिक स्थलों पर रहेगा फोकस

पहले चरण में चयनित स्थलों में धमतरी जिले का रुद्रेश्वर महादेव मंदिर, रुद्री और नगरी-सिहावा क्षेत्र का शृंगी ऋषि-सप्तर्षि आश्रम, जांजगीर-चांपा जिले का खरौद, सुकमा जिले के रामाराम और चिंतामीटर मंदिर, सरगुजा का रामगढ़ और सीता बेंगरा, रायगढ़ का रामझरना, कांकेर क्षेत्र का विष्णु मंदिर तथा सीतामढ़ी-हरचौका जैसे स्थल शामिल बताए गए हैं। चंदन मिहीं और चित्रकोट शिव मंदिर का भी प्रस्तावित स्थलों की सूची में उल्लेख है।

इन स्थलों का विकास धार्मिक आस्था, स्थानीय इतिहास और पर्यटन की संभावनाओं को ध्यान में रखकर किया जाना है। परियोजना के तहत मंदिर परिसरों और आसपास के क्षेत्रों में सुविधाओं के विस्तार पर जोर रहेगा।

Chhattisgarh Tourism:-श्रद्धालुओं के लिए बनेंगे आश्रय स्थल, सत्संग भवन और सीता रसोई

राम वनगमन परिपथ के अंतर्गत चयनित स्थलों पर श्रद्धालुओं, साधु-संतों और पर्यटकों के ठहरने के लिए आश्रय स्थल विकसित करने की योजना है। इसके अलावा सत्संग भवन और सीता रसोई जैसी सुविधाएं भी प्रस्तावित हैं, ताकि धार्मिक यात्राओं के दौरान लोगों को भोजन, विश्राम और सामुदायिक गतिविधियों के लिए बेहतर व्यवस्था मिल सके।

पर्यटन स्थलों पर बुनियादी सुविधाओं का विकास होने से स्थानीय लोगों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने पर स्थानीय परिवहन, खानपान, हस्तशिल्प और छोटे कारोबार से जुड़े लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।

Chhattisgarh Tourism:-पुराने अधूरे कामों को पूरा करने पर भी जोर

सरकार का ध्यान केवल नए स्थलों के विकास तक सीमित नहीं है। विभागीय समीक्षा में पहले से विकसित स्थलों पर अधूरे कार्यों को पूरा करने और निर्मित पर्यटन इकाइयों, सार्वजनिक शौचालयों तथा कैफेटेरिया का संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इन सुविधाओं के संचालन और रखरखाव में स्थानीय समितियों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

सीतामढ़ी-हरचौका और रामगढ़ जैसे स्थलों के विकास के साथ पहले से निर्मित सुविधाओं का बेहतर उपयोग भी परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगा।

Chhattisgarh Tourism:-धार्मिक पर्यटन से छत्तीसगढ़ को मिलेगी नई पहचान?

छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सुंदरता, प्राचीन मंदिरों, गुफाओं, वन क्षेत्रों और जनजातीय संस्कृति के लिए जाना जाता है। राम वनगमन पर्यटन परिपथ के व्यवस्थित विकास से इन विशेषताओं को धार्मिक पर्यटन के साथ जोड़ने का अवसर मिल सकता है।

हालांकि, परियोजना की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि विकास कार्य कितनी तेजी से पूरे होते हैं, सुविधाओं का रखरखाव कैसा रहता है और पर्यटकों को मौके पर कितनी बेहतर व्यवस्था मिलती है। आने वाले समय में इन स्थलों पर होने वाले काम और उनकी प्रगति पर नजर रहेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *