Raipur Nagar Nigam:-रायपुर निगम में ‘ईगो’ की एंट्री से बढ़ी टेंशन! सभापति बोले- शहर को हो रहा नुकसान, महापौर ने कहा- लड़ाई नहीं, समन्वय जरूरी

Raipur Nagar Nigam:-रायपुर। राजधानी रायपुर के नगर निगम में अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल को लेकर बहस एक बार फिर सामने आ गई है। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर निगम मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सभापति सूर्यकांत राठौर के बयान ने निगम की कार्यप्रणाली को लेकर नई चर्चा छेड़ दी। उन्होंने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच कथित ईगो और संवाद की कमी को शहर के हित में नुकसानदायक बताया।
रायपुर नगर निगम प्रदेश का सबसे बड़ा नगरीय निकाय है। मौजूदा व्यवस्था में महापौर मीनल चौबे निर्वाचित राजनीतिक नेतृत्व का प्रतिनिधित्व करती हैं, जबकि निगम प्रशासन की जिम्मेदारी आयुक्त के नेतृत्व में अधिकारियों के पास है। निगम की आधिकारिक वेबसाइट पर मीनल चौबे को महापौर और संबित मिश्रा को आयुक्त के रूप में दर्ज किया गया है।
Raipur Nagar Nigam:-‘ईगो से शहर को नुकसान हो रहा है’- सभापति
सभापति सूर्यकांत राठौर ने स्वतंत्रता दिवस समारोह के मंच से कहा कि अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच ईगो की स्थिति शहर के विकास को प्रभावित कर रही है। उनके मुताबिक, अपने लंबे राजनीतिक अनुभव में उन्होंने निगम के भीतर ऐसी स्थिति पहले नहीं देखी।

राठौर ने कहा कि वे लंबे समय से नगर निगम की राजनीति और कामकाज से जुड़े रहे हैं। पार्षद, एमआईसी सदस्य और नेता प्रतिपक्ष जैसी जिम्मेदारियों में रहते हुए उन्होंने अलग-अलग राजनीतिक परिस्थितियों में काम किया, लेकिन मौजूदा समय में संवाद की कमी ज्यादा महसूस हो रही है।
उन्होंने कथित तौर पर हाल के महीनों में जनप्रतिनिधियों से जुड़े विवादों के थाने और एफआईआर तक पहुंचने का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि कई मामलों को बातचीत और आपसी समन्वय के जरिए सुलझाया जा सकता है, लेकिन संवाद नहीं होने से विवाद बढ़ जाते हैं।
Raipur Nagar Nigam:-‘नगर निगम लड़ाई के लिए नहीं, जनता के लिए है’
सभापति ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि निगम में अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच टकराव से सबसे ज्यादा नुकसान आम जनता का होता है। उनका जोर इस बात पर था कि दोनों पक्षों को अपनी-अपनी भूमिका निभाते हुए शहर के विकास के लिए साथ काम करना चाहिए।
राठौर ने समन्वय पर जोर देते हुए कहा कि नगर निगम जनता की सेवा के लिए है और यहां विवाद की जगह संवाद होना चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि व्यक्तिगत अहंकार या पद की प्रतिष्ठा से ऊपर शहर और जनता के हित को रखना जरूरी है।
उन्होंने पुराने अधिकारियों और कर्मचारियों का उल्लेख करते हुए निगम के प्रति पहले के जुड़ाव को याद किया। उनके मुताबिक, पहले निगम को परिवार की तरह मानने की भावना ज्यादा दिखाई देती थी, जबकि अब उस तरह का जुड़ाव कम महसूस होता है।
Raipur Nagar Nigam:-महापौर बोलीं- ‘लड़ाई नहीं, समन्वय की जरूरत’
सभापति के बयान के बाद महापौर मीनल चौबे ने निगम में किसी तरह की लड़ाई होने की बात से इनकार किया। उन्होंने स्थिति को अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय की जरूरत के रूप में बताया।
महापौर के मुताबिक, सभी मिलकर काम कर रहे हैं और बेहतर परिणाम के लिए संवाद तथा भाषा में संयम बनाए रखना जरूरी है। उनका कहना था कि यह बात जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों दोनों पर समान रूप से लागू होती है।
यानी जहां सभापति ने ‘ईगो’ और संवादहीनता को समस्या बताया, वहीं महापौर ने इसे टकराव के बजाय समन्वय से जोड़कर देखने की बात कही।
Raipur Nagar Nigam:-नेता प्रतिपक्ष ने भी सभापति की बात का किया समर्थन
नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने भी सभापति के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि उनके लंबे अनुभव के आधार पर कही गई बात को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को एक-दूसरे का पूरक बताते हुए कहा कि दोनों के बीच बेहतर तालमेल के बिना शहर का विकास संभव नहीं है। उनके मुताबिक, हाल के महीनों में सामने आई खींचतान निराशाजनक है और इसे बातचीत के जरिए खत्म करने की जरूरत है।
Raipur Nagar Nigam:-जुलाई में भी बुलाई गई थी समन्वय बैठक
यह भी ध्यान देने वाली बात है कि जुलाई 2026 में सभापति सूर्यकांत राठौर ने नगर निगम में समन्वय को लेकर सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। बैठक में नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी समेत सत्ता पक्ष, विपक्ष और अन्य पार्षदों की मौजूदगी रही थी। इससे संकेत मिलता है कि निगम के भीतर बेहतर समन्वय और सामान्य सभा के सुचारु संचालन का मुद्दा पहले से चर्चा में रहा है।
वहीं, अक्टूबर 2025 की एक रिपोर्ट में भी सामान्य सभा की बैठक से पहले सभापति द्वारा सत्ता पक्ष, विपक्ष और निर्दलीय पार्षदों की बैठक बुलाकर सदन के व्यवस्थित संचालन के लिए सकारात्मक सहयोग की अपील किए जाने का उल्लेख मिलता है।
Raipur Nagar Nigam:-अब असली परीक्षा समन्वय की
रायपुर नगर निगम में राजनीतिक नेतृत्व और प्रशासनिक व्यवस्था के बीच बेहतर तालमेल सीधे तौर पर शहर के विकास और नागरिक सेवाओं से जुड़ा है। सड़क, सफाई, पानी, निर्माण, राजस्व और दूसरी मूलभूत सेवाओं से जुड़े फैसलों में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की अलग-अलग जिम्मेदारियां होती हैं।
ऐसे में सभापति का ‘ईगो’ वाला बयान, महापौर का ‘समन्वय’ पर जोर और नेता प्रतिपक्ष का समर्थन—तीनों को एक साथ देखा जाए तो साफ है कि निगम में बेहतर संवाद की जरूरत को लेकर अलग-अलग पक्षों की चिंता लगभग एक जैसी है।
अब देखना यह होगा कि स्वतंत्रता दिवस के मंच से उठी यह बात केवल बयान तक सीमित रहती है या फिर निगम के भीतर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद की कोई ठोस व्यवस्था बनती है। क्योंकि विवाद चाहे किसी भी स्तर पर हो, उसका असर आखिरकार रायपुर शहर और यहां रहने वाले लोगों पर ही पड़ता है।
