छत्तीसगढ़

Chhattisgarh News:-छत्तीसगढ़ की वन भूमि पर बाहरी राज्यों का अवैध कब्जा, शिकायतों के बाद भी वन विभाग की कार्रवाई,नदारदरघुनाथनगर वन परिक्षेत्र का मामला, सैकड़ों एकड़ जंगल पर खतरा

Chhattisgarh News:-छत्तीसगढ़ के रघुनाथनगर वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम तुगुवां में शासकीय वन भूमि पर बड़े पैमाने पर अवैध कब्जे का गंभीर मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश से आए लोग सुनियोजित तरीके से जंगल की जमीन पर कब्जा कर रहे हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि पहले जंगल की लकड़ियां काटी जा रही हैं, फिर उन्हीं लकड़ियों से मिट्टी और लकड़ी के अवैध मकान बनाए जा रहे हैं। इस गतिविधि से न केवल वन संपदा को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि वन कानूनों की भी खुलेआम अनदेखी हो रही है।


भू-माफिया सक्रिय, लंबे समय से चल रहा खेल

ग्रामीणों के मुताबिक यह अवैध बसाहट हाल की नहीं है, बल्कि कई महीनों से योजनाबद्ध तरीके से की जा रही है। इसके पीछे भू-माफिया गिरोह सक्रिय हैं, जो सैकड़ों एकड़ वन भूमि पर कब्जा कर चुके हैं।

इससे जंगल का प्राकृतिक स्वरूप तेजी से बदल रहा है और वन्य जीवों के अस्तित्व पर भी खतरा मंडरा रहा है।


Chhattisgarh News:-शिकायतें हुईं, लेकिन कार्रवाई शून्य

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार वन विभाग के अधिकारियों को लिखित और मौखिक शिकायतें दीं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

ग्रामीणों में रोष है और उनका आरोप है कि वन विभाग के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत के कारण ही अवैध कब्जाधारी बेखौफ होकर जंगल उजाड़ रहे हैं।


ग्राम पंचायत का प्रस्ताव भी बेअसर

मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधियों ने बैठक कर अवैध कब्जा हटाने का प्रस्ताव पारित किया और वन विभाग को लिखित सूचना दी, लेकिन इसके बावजूद विभाग की ओर से कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।


Chhattisgarh News:-कब्जाधारियों ने वनरक्षक पर किया हमला

इस पूरे मामले में वनरक्षक अंजनी सोनवानी ने बताया कि अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ कई बार कार्रवाई की गई है।
उन्होंने कहा—

“बीते दिनों कुछ कब्जाधारियों ने मुझ पर हमला भी किया था। अब इस मामले में संयुक्त कार्रवाई की जाएगी।”

वहीं वन मंडलाधिकारी आलोक वाजपेई ने कहा कि—

“टीम गठित कर जल्द ही अवैध कब्जे हटाए जाएंगे और दोषियों पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

ग्रामीणों की चेतावनी

स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और उच्च वन अधिकारियों से मांग की है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में पूरे क्षेत्र की वन संपदा पूरी तरह नष्ट हो सकती है।

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